बसंत अबना जैई

हरि भरि धरती मा बसंत ऋतुकु म्वौऴ।
जडांदि गडग्डांदि गात घामे की झौऴ।।

भीठा फ्यौलि फूलूंमा दिखैंण ल्गिन,
जौ सरसों पुंगड़ियौं फुल्यारा ह्वैगिन,
सगौड़ौं बानि बानि रिंगदा तितलियों टौळ।
हरि भरि यीं धरतीमा बसंत ऋतु म्वौळ।

खैंणा का जौड़ा अंगर्याल घुमंणांणा,
शुकूं का झुंड आरू तिमुलू कच्वौणां,
आकाश बिटिन प्वथ्ऴा ख्वजदा ग्ऑऴ।
हरि भरि यीं धरतीमा बसंत ऋतु म्वौऴ।।

घामकी झौल डाला बौटला मौल्लिन,
गाड गधैरूं रौलियौं मा फूल फूलिन,
पाख्युं पाख्युंमा धार बिटि घामे झ्वौऴ।
हरि भरि यीं धरतीमा बसंत ऋतु म्वौऴ।।

सुख्यां पत्गा छौडी बौंण नवांण धन्ना,
आमुं का डाळा बौरों का झुंड ख्यनां,
सरसरी बथौं ह्युं डाडौं कांठियौं शरीळ।
हरि भरि यीं धरतीमा बसंत ऋतु म्वौळ।।

सुनील सिंधवाल "रोशन"।

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