नासूर घावों को मरहम
नासूर बने घावों तिलांजलि देना जरूरी है। पाक परस्त सामंतों को आजादी जरूरी है। मांग रहे आजादी तो खुल के देदो, आजादी संग संकल्प नथी कर दो बहुत तड़फ चाहत हूरों के संग को, हूरों को अब इंतजार मत करने दो। जिंदगी को हूरों का जीवनसाथी जरूरी है। नासूर बने घावों तिलांजलि देना जरूरी है।। कुछ को कश्मीर में दे दी आजादी, अभी पंक्ति सजाये कई कई बैठे हैं। मजहबी प्यार जिनको अलगाव से, अजीब हो तुम टांग अड़ाए बैठे हैं। जन्नत खाली है रिक्त पद भरना जरूरी है। नासूर बने घावों तिलांजलि देना जरूरी है। टुकड़ों टुकड़ों संग में रहना जिनको, आजादी को इनकी भी लिस्ट बना दो। दर्द सहन नहीं होता है मां भारती को, आजादी का समय भी मुकर्रर कर दो। समयानुसार देह समर्पण करना जरूरी है। नासूर बने घावों तिलांजलि देना जरूरी है।। अतिक्रमण शिक्षा मंदिर पे देखा होगा, अब सड़क चौराहों नंगा नाच खेल रहे। कब तक बोझ तले बैठेंगे शहजादों के, उर्वशी मेनका घड़ी में इंतजार देख रहे। नारी सम्मान में जन्नत का ध्यान जरूरी है। नासूर बने घावों तिलांजलि देना जरूरी है।। सुनील सिंधवाल "रोशन"। ----------------------------